स्वामी नित्यानंद जी
1885 से 24 अप्रैल 1977संगीत शिक्षा :- बचपन में आपकी रुची इस प्रकार की थी कि जिस नई चीज को अच्छा समझते थे वही शीध्र ही सी...
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1885 से 24 अप्रैल 1977संगीत शिक्षा :- बचपन में आपकी रुची इस प्रकार की थी कि जिस नई चीज को अच्छा समझते थे वही शीध्र ही सी...
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पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी जी एक युवक दार्शनिक विद्वान् थे जिन्होंने चौबीस वर्ष (24) की अल्पायु में ही संस्कृत, अरबी, फ़ार...
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निष्ठावान प्रचारक, कार्यकर्ता, लेखक वह पत्रकार श्री ईश्वारीप्रसाद प्रेम/ महात्मा प्रेमभिक्षु जी का जन्म मथुरा के दरवै (द...
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आर्यसमाज के शीर्ष विद्वान् रहे प. शिवपूजनसिंह कुशवाहा और उनके लेखकीय कार्यों का संक्षिप्त विवरणपं. शिवपूजन सिंह कुशवाहा...
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स्वामी दयानंद कि वैदिक विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने में हज़ारों आर्यों ने अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान दिया। साह...
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“आर्य समाज की वह महान विभूति, जिन्होंने ऋषिवर के अधूरे वेद-भाष्य को पूर्ण किया तथा अनेक दार्शनिक ग्रन्थों की रचना की-ऐसे...
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प्रान्तीय आर्य वीर चरित्र निर्माण शिविर 2026 – संपूर्ण जानकारी (SEO आधारित लेख)आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश के तत्वाव...
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आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती के वेद-आधारित राष्ट्रनिर्माण के आदर्शों पर आधारित आर्य वीर दल युवा शक्ति का...
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और पढ़ें → →शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक — तीन स्तंभों पर खड़ी यह संस्कारशाला सच्चे आर्यवीर तैयार करती है।
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और पढ़ें → →सोलह वैदिक संस्कारों को केवल पढ़ाया नहीं बल्कि जीवन में उतारा जाता है।
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और पढ़ें → →एकेश्वरवाद, कर्म सिद्धांत, ऋत-सत्य, यज्ञ भावना, नारी सम्मान — वैदिक सिद्धांतों को क्रियान्वित करता है आर्य वीर दल।
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और पढ़ें → →आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रत्येक शाखा को जीवंत, अनुशासित एवं प्रभावशाली बनाने हेतु निम्नलिखित १२ आवश्यक योजना...
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और पढ़ें → →संस्कृति रक्षा · शक्ति संचय · राष्ट्र सेवा — तीनों स्तम्भ प्रत्येक शिविर में सम्मिलित, हवन यज्ञ से प्रारंभ।