कार्यकारिणी
संगठन का नेतृत्व
हमारे पदाधिकारी
पदाधिकारियों के दायित्व
आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती के वेद-आधारित राष्ट्रनिर्माण के आदर्शों पर आधारित आर्य वीर दल की कार्यकारिणी में प्रत्येक पदाधिकारी का स्पष्ट दायित्व निर्धारित है।
१. संरक्षक
वैचारिक एवं नैतिक मार्गदर्शक। प्रेरक-भूमिका, प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं।
२. प्रांतीय संचालक
प्रशासनिक प्रधान। संपूर्ण प्रांत की शाखाओं का संचालन, वार्षिक कार्ययोजना, प्रशिक्षण शिविर।
३. कमिश्नरी संचालक
कमिश्नरी के अंतर्गत जिलों का समन्वय एवं मासिक समीक्षा।
४. महामंत्री
कार्यकारी संयोजक। बैठक कार्यवाही, पत्र-व्यवहार, क्रियान्वयन निगरानी।
५. मंत्री
विशेष अभियान, शाखाओं से संपर्क, आंतरिक समन्वय।
६. संगठन मंत्री
सदस्यता अभियान, नई शाखाओं की स्थापना। लक्ष्य: "प्रत्येक नगर-ग्राम में आर्य वीर दल की शाखा"।
७. कोषाध्यक्ष
पारदर्शी आय-व्यय, वार्षिक लेखा-प्रतिवेदन, निधि संग्रह।
८. बौद्धिकाध्यक्ष
वैदिक साहित्य, साप्ताहिक बौद्धिक सत्र, वैचारिक शुद्धता।
९. प्रांतीय प्रचारक
प्रचार-प्रसार, प्रवास कार्यक्रम, प्रेरक भाषण।
१०. प्रांतीय शिक्षक
शारीरिक, व्यायाम, दंड-योग, लाठी, योगासन का प्रशिक्षण।
११. कार्यालय मंत्री
अभिलेख संधारण, पत्राचार, सदस्यता रजिस्टर।
१२. मीडिया प्रभारी
सोशल मीडिया, प्रेस विज्ञप्ति, सकारात्मक छवि निर्माण।
मूल मंत्र
“शक्ति, भक्ति और युक्ति से राष्ट्रनिर्माण”
प्रांतीय चरित्र निर्माण शिविर — २०२६
संस्कृति रक्षा · शक्ति संचय · राष्ट्र सेवा — तीनों स्तम्भ प्रत्येक शिविर में सम्मिलित, हवन यज्ञ से प्रारंभ।