मनुष्य निर्माण की कुशल संस्कारशाला का नाम है आर्य वीर दल
शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक — तीन स्तंभों पर खड़ी यह संस्कारशाला सच्चे आर्यवीर तैयार करती है।
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शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक — तीन स्तंभों पर खड़ी यह संस्कारशाला सच्चे आर्यवीर तैयार करती है।
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और पढ़ें → →सोलह वैदिक संस्कारों को केवल पढ़ाया नहीं बल्कि जीवन में उतारा जाता है।
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और पढ़ें → →एकेश्वरवाद, कर्म सिद्धांत, ऋत-सत्य, यज्ञ भावना, नारी सम्मान — वैदिक सिद्धांतों को क्रियान्वित करता है आर्य वीर दल।
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और पढ़ें → →आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रत्येक शाखा को जीवंत, अनुशासित एवं प्रभावशाली बनाने हेतु निम्नलिखित १२ आवश्यक योजना...
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और पढ़ें → →दैनिक शाखा और साप्ताहिक सत्संग — शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास का समन्वय।
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और पढ़ें → →आर्य वीर दल आर्य समाज रूपी उद्यान का कुशल माली है जो खरपतवार हटाता और पौधों को सींचता है।
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और पढ़ें → →वैदिक ऋषियों ने सत्य, मानवता, चरित्र, समानता और प्रकृति-श्रद्धा को संस्कृति का आधार बनाया।
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और पढ़ें → →प्रांतीय संचालक — आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक आज के परिवर्तित सामाजिक परिदृश्य में जब युवा पीढ़ी अनेक प्रकार की चुनौतियों—...
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और पढ़ें → →वैदिक संस्कृति की रक्षा और प्रचार भी आर्य वीर दल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
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और पढ़ें → →शाखाओं का पुनरुद्धार, प्रशिक्षण शिविर और आधुनिक मीडिया का उपयोग — पुनर्जागरण का मार्ग।
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और पढ़ें → →यदि देश के प्रत्येक गाँव में शाखाएँ सक्रिय हो जाएँ तो भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।
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और पढ़ें → →समन्वय, अनुशासन और एकरूपता — संगठन के तीन स्तंभ हैं।
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और पढ़ें → →संस्कृति रक्षा · शक्ति संचय · राष्ट्र सेवा — तीनों स्तम्भ प्रत्येक शिविर में सम्मिलित, हवन यज्ञ से प्रारंभ।