व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान (तृतीय भाग)
यदि देश के प्रत्येक गाँव में शाखाएँ सक्रिय हो जाएँ तो भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।
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यदि देश के प्रत्येक गाँव में शाखाएँ सक्रिय हो जाएँ तो भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।
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और पढ़ें →समन्वय, अनुशासन और एकरूपता — संगठन के तीन स्तंभ हैं।
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और पढ़ें →संगठन अपने शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है। डिजिटल युग में युवाओं को जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है।
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और पढ़ें →राष्ट्र की वास्तविक सत्ता उसकी संस्कृति में निहित होती है। आर्यवीर इस संस्कृति का सजग प्रहरी है।
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और पढ़ें →यदि विद्वान ही मौन रहेंगे तो संगठन को दिशा देना कठिन हो जाएगा।
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और पढ़ें →आर्य वीर दल के प्रत्येक आर्यवीर का मूल मंत्र है — शरीर से सबल, मन से निर्भीक और चरित्र से महान बनना।
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और पढ़ें →आर्य वीर दल वह संस्कारशाला है जहाँ से निकलकर युवक सच्चे आर्य और समर्पित समाजसेवी बनते हैं।
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और पढ़ें →संगठन का मूल तत्व उसके सिद्धांत होते हैं। व्यक्ति विशेष की महत्ता सिद्धांतों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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और पढ़ें →आर्य वीर दल एक ऐसा संगठन है जो व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहा है।
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और पढ़ें →व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, बिना संगठन के वह अधूरा है।
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और पढ़ें →समन्वय संगठन की आत्मा है। इसके बिना कोई भी संगठन लंबे समय तक टिक नहीं सकता।
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और पढ़ें →अनुशासन ही वह अदृश्य सूत्र है, जो विविध व्यक्तियों को एक लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है।
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और पढ़ें →संस्कृति रक्षा · शक्ति संचय · राष्ट्र सेवा — तीनों स्तम्भ प्रत्येक शिविर में सम्मिलित, हवन यज्ञ से प्रारंभ।