प्रांतीय आर्य वीरांगना चरित्र निर्माण शिविर का तृतीय दिवस रामरति रामविचार सरस्वती बालिका विद्या मंदिर, बलिया (उत्तर प्रदेश) में अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं वैदिक वातावरण के मध्य संपन्न हुआ। प्रातःकालीन सत्र में आचार्य अरुण वीर जी ने बालिकाओं को वैदिक धर्म के मूल सिद्धांतों, उसके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक स्वरूप तथा जीवन में उसके महत्व से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि वैदिक धर्म सत्य, ज्ञान, सेवा एवं मानवता का मार्ग प्रशस्त करता है तथा प्रत्येक बालिका को इन आदर्शों को अपने जीवन में धारण करना चाहिए।
इसके उपरांत आचार्या आर्याशा जी के निर्देशन में बालिकाओं ने यज्ञ एवं सायं-संध्या का अभ्यास किया। उन्होंने यज्ञ एवं संध्या के आध्यात्मिक, नैतिक तथा वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए कहा कि इनका नियमित अभ्यास व्यक्ति के व्यक्तित्व को संस्कारित, अनुशासित एवं आत्मबल से परिपूर्ण बनाता है।
बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने बालिकाओं का आह्वान किया कि वर्तमान समय में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक चुनौतियाँ निरंतर बढ़ रही हैं। ऐसे समय में प्रत्येक बालिका का कर्तव्य है कि वह वैदिक ज्ञान, सुदृढ़ चरित्र और आत्मविश्वास को अपना सबसे बड़ा बल बनाए।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के नाम पर फैल रही अनेक कुरीतियाँ, नशे की प्रवृत्ति, अश्लीलता, अंधानुकरण, डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग तथा भारतीय संस्कृति से विमुख करने वाले विभिन्न प्रलोभनों से सजग रहना आवश्यक है। उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि विवेक, संयम, अनुशासन और स्वाध्याय ही जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं तथा इन्हीं के आधार पर वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए आदर्श बन सकती हैं।
आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक ने कहा कि आर्य वीरांगना का जीवन केवल आत्मविकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे समाज में जागरूकता, सेवा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम भी बनना चाहिए। उन्होंने बालिकाओं से वैदिक आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने, सत्य एवं धर्म के मार्ग पर दृढ़ रहने तथा प्रत्येक परिस्थिति में साहस, धैर्य एवं आत्मविश्वास का परिचय देने का आह्वान किया।
सत्र के अंत में सभी शिविरार्थी बालिकाओं ने वैदिक संस्कृति, राष्ट्रसेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं चरित्र निर्माण के आदर्शों का पालन करने का संकल्प लिया तथा पूरे उत्साह, अनुशासन और समर्पण भाव के साथ शिविर की विविध गतिविधियों में सहभागिता की।
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